लद्दाख में तनाव: भारत-चीन सेना के कमांडरों की मीटिंग में क्या हुआ, विदेश मंत्रालय ने बताया

लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव है. इसे दूर करने के लिए 6 जून को दोनों देशों की सेनाओं के कमांडरों की मीटिंग हुई. विदेश मंत्रालय ने 7 जून को बातचीत के बारे में जानकारी दी. कहा कि भारत और चीन के बीच शांति और समझदारी से बातचीत हुई. दोनों देश शांति से सीमा विवाद सुलझाना चाहते हैं. दोनों देशों के बीच पहले जो समझौते हुए हैं, उन्हीं के हिसाब से आगे बढ़ा जाएगा. विदेश मंत्रालय ने कहा कि आपसी रिश्ते के लिए भारत-चीन सीमा के इलाके में शांति जरूरी है. इसके लिए दोनों देश आगे भी मिलकर काम करेंगे.


दोनों पक्षों ने माना कि इस साल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों की शुरुआत के 70 साल हो रहे हैं. वर्तमान विवाद का जल्द समाधान होने से रिश्ते मजबूत होंगे. इसी क्रम में, दोनों देश सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रखेंगे जिससे हालात ठीक हो सकें और सीमाई इलाके में शांति बनी रहे.

6 जून को क्या हुआ था?

14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह के नेतृत्व में भारतीय दल मोल्डो गया था. मोल्डो लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के दूसरी तरफ चीनी सीमा में है. चीन की तरफ से साउथ शिनजियांग मिलिट्री कमांड के कमांडर मेजर जनरल लियो लिन मौजूद रहे. करीब तीन घंटे तक दोनों पक्षों में बातचीत हुई. हालांकि आधिकारिक रूप से बातचीत की जानकारी नहीं दी गई है. इससे पहले भी सात बार मिलिट्री लेवल की बातचीत दोनों देशों के बीच हो चुकी है. चार बार ब्रिगेडियर और तीन बार मेजर जनरल रैंक ऑफिसर के साथ ये बातचीत बेनतीजा रही थी.


'सेना पीछे हटाए चीन,'

लेकिन माना जा रहा है कि भारत ने लद्दाख में पुरानी स्थिति बहाल करने को कहा है. इस बारे में इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है. इसमें लिखा है कि बैठक में पैंगोंग लेक, फिंगर फोर और फिंगर फाइव में चीन के दबाव और चीनी सेना की तैनाती पर बात हुई. भारत ने चीन से कहा कि वह लद्दाख में अप्रैल 2020 वाला स्टेटस कायम करे. यानी अपनी सेना पीछे ले जाए. और जो भी टैंट वगैरह लगाए हैं, उन्हें हटा लें. भारत ने चीन से गलवान घाटी में सेना की तैनाती कम करने को भी कहा.

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