अमेरिका-इज़रायल के लिए काम करने वाले जासूस को फांसी देने जा रहा है ईरान?

अमेरिका-इज़रायल के लिए काम करने वाले जासूस को फांसी देने जा रहा है ईरान?

ये कहानी है साल 1957 में पैदा हुए एक लड़के की. वो लड़का, जो ईरान के पूर्वी हिस्से में बसे एक छोटे से गांव ‘राबोर’ का रहना वाला था. वो बस 13 साल का था, जब एक दिन उसे अपने पिता के खेत, अपना गांव, सब छोड़कर पास के शहर में मज़दूरी के लिए जाना पड़ा. मज़दूरी इसलिए ताकि वो अपने किसान पिता को गिरफ़्तार होने से बचा सके. उस पिता को, जिन्होंने खेती के वास्ते सरकार से कुछ कर्ज़ तो लिया, मगर कर्ज़ लौटा नहीं पाए. इसी कर्ज़ के कारण उस लड़के ने ख़ुद स्कूल जाने की उम्र में एक स्कूल की कन्स्ट्रक्शन साइट पर ईंट-गारा उठाया. महीनों तक उसने यूं ही मज़दूरी की और अपने परिवार का कर्ज़ा उतारा.
जब अमेरिका ने लोकतांत्रिक सरकार गिरवाई…
हालात ऐसे थे कि बड़ी मुश्किल से हाई स्कूल तक पढ़ाई हो पाई. मगर स्कूली तालीम की ये कसर भविष्य चमकाने के उसके सपनों के आड़े नहीं आई. क्यों? क्योंकि उन दिनों ईरान में भविष्य बनाने के लिए तालीम से कहीं ज़्यादा ज़रूरत थी सत्ता-विरोधी गुस्से की. इस गुस्से के दो निशाने थे. एक निशाना, ईरान के तत्कालीन शासक शाह मुहम्मद रज़ा पहलवी. और दूसरा निशाना, पहलवी का सपोर्टर अमेरिका. पहलवी को कितना सपोर्ट करता था अमेरिका, इस बात का अंदाज़ा यूं लगाइए कि उन्हें सत्ता में वापस लाने के लिए 1953 में CIA ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई ईरान की मुहम्मद मोसादेग सरकार का तख़्तापलट करवा दिया था. ये अमेरिका की वो ग़लती थी, जिसने 1979 में कट्टर इस्लामपंथियों को ईरान की सत्ता दिलाई. वो सत्ता, जिसके साथ हमारे उस राबोर के लड़के का बड़ा करीबी नाता होने वाला था. वो उस सत्ता को लाने वाले पैदल सिपाहियों से शुरुआत करके उसके सबसे ताकतवर लोगों में शुमार होने वाला था.
क्या नाम था इस लड़के का?
इसका नाम था- क़ासिम सुलेमानी. वही जनरल क़ासिम सुलेमानी, जो 3 जनवरी 2020 को बगदाद इंटरनैशनल एयरपोर्ट के बाहर एक अमेरिकी एयरस्ट्राइक में मारे गए. वही जनरल सुलेमानी, जिनकी हत्या के बाद मिडिल-ईस्ट में एक और खुल्लमखुल्ला जंग के हालात बन गए थे. 9 जून को ईरान से आई एक ख़बर जनरल सुलेमानी को फिर से सुर्खियों में ले आई है.
ईरान ने सुलेमानी की हत्या पर क्या कहा?
अपने इस स्टेटमेंट में ईरान ने एक और बात का ज़िक्र किया. क्या कहा ईरान ने? ईरान ने दोहराया कि सुलेमानी की हत्या अमेरिकी सरकार द्वारा की गई आतंकवादी कार्रवाई थी. ईरान द्वारा लगाए इस इल्ज़ाम का क्या संदर्भ है? जनरल सुलेमानी की हत्या को ईरान आतंकवाद क्यों मानता है? जनरल सुलेमानी ईरान के लिए क्या अहमियत रखते थे? उनके मारे जाने से अमेरिका को क्या हासिल हुआ? इस ख़बर में हम इन्हीं सवालों के जवाब बताएंगे आपको.
हमने आपको शुरुआत में सुलेमानी के बचपन की कहानी सुनाई थी. तब हम जंप करके सीधा बचपन से सुदूर फ़्यूचर पर पहुंच गए थे. अब सुलेमानी की अहमियत समझने के लिए उनकी कहानी को फिर से कन्टिन्यू करते हैं. आप जानते हैं कि 1979 में अयातोल्लाह ख़ोमेइनी के नेतृत्व में ईरान की इस्लामिक क्रांति हुई. सत्ता में आने के बाद कट्टर इस्लामिक तौर-तरीके क़ायम करने के लिए कई संस्थाएं बनाई गईं. इनमें से ही एक संस्था थी- इस्लामिक रेवॉल्यूशनरी गार्ड कोर, यानी IRGC. इसका काम था, ईरान के इस्लामिक सिस्टम की रक्षा करना. और, ईरान की सशस्त्र सेना को मदद करना. इसकी कमान सीधे सुप्रीम लीडर के हाथों में थी. 22 साल के क़ासिम सुलेमानी भी IRGC में भर्ती हो गए.

इस जंग से ईरान ने क्या सबक सीखा?
इस युद्ध में न केवल सुलेमानी ने ख़ूब नाम कमाया, बल्कि ईरान की तरह उन्होंने भी कई ज़रूरी सबक सीखे. इनमें से एक अहम सबक था- छद्म युद्ध. ये सबक कहता था कि सीधी लड़ाई में नुकसान है, इसीलिए इनडाइरेक्ट लड़ो. अलग-अलग जगहों पर अपने विरोधियों के खिलाफ विद्रोही खड़े करो. उन विद्रोहियों को हथियार दो, ट्रेनिंग दो, उनकी मदद करो. जैसे- लेबनान में हिज़बुल्लाह की मदद. और फिर हिज़बुल्लाह के हाथों अमेरिका और इज़रायल जैसे दुश्मन देशों पर हमले करवाओ.

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