योगी राज में जमात की मदद करना प्रोफेसर को पड़ा भारी?
आज का हमारा मुद्दा इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद से जुड़ा हुआ है। दरअसल मोहम्मद शाहिद वही प्रोफेसर हैं । जिसको मीडिया ने कोरोना प्रोफेसर का नाम दे दिया था। कोरोना वायरस करके कोरोना प्रोफेसर तक की कहानी आप सबको मालूम है। किस तरह से मीडिया ने एक प्रोपेगेंडा चलाया था। जिससे जमाती हो को बदनाम करने की पूरी साजिश रची गई थी।
उसी का एक शिकार हुए राजनीतिक विभाग के यानी पॉलिटिकल साइंस के एक प्रोफेसर मोहम्मद शब्बीर दरअसल मामला पूरा था, कि 15 मई को इन्हें जमानत मिली लेकिन 20 हजार के दो मुचलके भरने के बाद जमानत मिली उसके बावजूद भी उनको छोड़ा नहीं गया,क्यों नहीं छोड़ा गया आज हम इसी पर चर्चा करेंगेदरअसल पूरा मामला है कि 21 मार्च को जमाती हो का एक दल बिहार जा रहा था। लेकिन बीच में लॉक डाउन हो गया जिसके कारण यह लोग प्रयागराज यानी पुराना इलाहाबाद में उतर गए।
इनमें से 7 लोग विदेशी जमाती थे। लेकिन टोटल आदमी इस जमात में 32 थे। इसके बाद जमात को प्रयागराज उतरना पड़ा जिसके बाद मोहम्मद शाहिद ने इनकी मदद की इसके बाद उनको वहां की मस्जिद में रखा गया।जिसके बाद 31 मार्च को वहां पर छापा मारा गया। और 32 के 32 लोगों को कोर्ट इन कर दिया गया। इस मामले में 17 लोगों पर एफ आई आर दर्ज कर दी गई। लेकिन इसके बावजूद शाहगंज थाने में एफ आई आर दर्ज की गई इसमें से तभी से 15 मई से इन को अरेस्ट किया हुआ थाऔर 15 मई को इनको एक जमानत मामले में जमानत मिली जमानत ₹20000 के मुचलके भरने पर मिलेऔर दूसरी तरफ इन पर एक महामारी का एक्ट के तहत एफ आई आर दर्ज हुई थी जिसके अभी चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है इसलिए इनको अभी छोड़ा नहीं गया।
इसको आप जुल्म नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद अभी भी जेल के अंदर बंद है उनको अभी तक भी नहीं छोड़ा गया है। यह है पूरा मामला जिसको मीडिया ने को रोना प्रोफेसर बनाकर जनता के सामने पेश करने की कोशिश की थी।
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